हर कोई कभी न कभी लंबी छुट्टियों पर घर से बाहर जाना चाहता है, तो इस बार छुट्टियों पर जाने से पहले अपने बगीचे की देखभाल सुनिश्चित करके जाएं. यहां हम आपको कुछ आसान तरीके बता रहे हैं जिन्हें अपनाकर आप घर पर न रहते हुए भी पौधों को पर्याप्त पानी और TLC उपलब्ध करवा सकते हैं.

तपती गर्मियों में छुट्टियां मनाने कौन नहीं जाना चाहता, लेकिन कहीं यही छुट्टियां और गर्मियां आपके घर के अंदर और बाहर रखे पौधों के लिए अभिशाप न बन जाएं. ऐसा न हो कि शानदार छुट्टियां मनाकर वापस आने पर बिखरे हुए, फूल रहित या मृत पौधे आपका स्वागत करें. कारण: पानी की कमी, जो गर्मियों में पौधों के लिए जानलेवा साबित होता है. इसलिए, उन्हें अच्छी तरह से हाइड्रेटेड रखना उन्हें स्वस्थ रखने का बेहतरीन तरीका है. बेंगलुरु के ग्रीन माय लाइफ की संस्थापक गीतांजलि राजमणि कहती हैं, "एक पौधे के लिए नियमित रखरखाव की गतिविधियों में पानी देना, कीट नियंत्रण, छंटाई और खाद देना शामिल होता है. अगर आप बाहर गए हैं, तो कुछ समय के लिए इन गतिविधियों को विराम दे सकते हैं, लेकिन पौधे को नियमित रूप से पानी देना बहुत ज़रूरी है”. पौधों को खुश कैसे रखा जाए और उनकी अच्छी देखभाल कैसे की जाए, यह जानने के लिए पढ़ें.

ड्रिप इरिगेशन सिस्टम

हालांकि देखने में यह थोड़ा अलग और जटिल लग सकता है, लेकिन अगर आप यह चाहते हैं कि पौधों को सही समय पर पानी मिलता रहे, तो ड्रिप सिंचाई प्रणाली यह सुनिश्चित करने का सबसे आसान तरीका है. गीतांजली बताती हैं, "यह प्रणाली सीधे पौधे को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी देती रहती है. इसके कारण खरपतवार कम हो जाते हैं, पानी की बर्बादी कम होती है और पौधों को पर्याप्त पानी भी मिलता रहता है. आप ऑटोमेटिक प्रणाली के साथ अपने पौधों को पानी देने का समय निर्धारित कर सकते हैं. यह आपको पानी देने का समय और आवृत्ति निर्धारित करने में मदद करता है.” ऑटोमेटेड वाटरिंग सिस्टम लंबी अवधि के लिए एक अच्छा और समझदार इन्वेस्टमेंट है, विशेष रूप से आपके किचन गार्डन के लिए, जिसमें अधिकतम उपज के लिए सिर्फ सही समय पर पानी देना होता है. बेंगलुरु के गीकगार्डनर ग्रीनटेक (geekgardener.in) के संस्थापक मणिकंदन पट्टबीरमन बताते हैं, "अलग-अलग पौधों की आवश्यकताओं के अनुरूप टेस्टिंग और फाइन ट्यूनिंग करने में समय लगता है और इसके लिए पहले से योजना बनाकर काम करना पड़ता है. ड्रिप सिंचाई प्रणाली को पानी की एक निश्चित मात्रा के साथ ऑटोमेटिक रूप से/मैन्युअल रूप से पौधों को पानी देने के लिए डिज़ाइन किया गया है. पानी ट्यूबिंग के माध्यम से दिया जाता है, ट्यूबिंग के साथ अलग-अलग मात्रा से पानी छोड़ने वाले उपकरण आते हैं. इससे यह सुनिश्चित होता है कि पानी सही तरीके से दिया जा रहा है".

सेल्फ वाटरिंग प्लांटर्स

ये विकल्प छोटी छुट्टियों के लिए बेहतरीन समाधान का काम करते हैं. इस विधि से पौधों को जीवित रहने के लिए जितने पानी की आवश्यकता होती है, उतना पानी उन्हें मिलता रहता है. यह एक रिजरवोयर प्रणाली पर काम करता है, जिसमें कंटेनर के नीचे एक पानी से भरा टैंक होता है. साथ ही इसमें अतिरिक्त पानी को निकालने के लिए एक नल भी लगा होता है. यह संयंत्र रिजरवोयर से पानी खींचता है. गीतांजलि कहती हैं,"बाहर जाने से पहले रिजरवोयर को पर्याप्त रूप से भरकर जाएं, ताकि आपके आने तक इसका पानी खत्म न हो".

हाइडोजेल

हाइड्रो जैल के उपयोग से अपने पौधों को सूखे से निपटने में मदद करें. मणिकनंदन बताते हैं "जब पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होता है तो हाइड्रो जैल आवश्यकता से अधिक पानी अवशोषित कर लेते हैं, और सूखे के समय वही पानी पौधों को वापस करते हैं."हाइड्रो जैल एक प्रकार के पॉलीमर क्रिस्टल होते हैं जो पानी अवशोषित करने और रोक कर रखने की क्षमता रखते हैं और इसे आवश्यकतानुसार पौधे तक पहुंचाते हैं. इनमें अपने वजन से 500 गुना तक पानी अवशोषित करने और सूखा वातावरण आने पर पानी को वापस छोड़ने की क्षमता पाई जाती है. तो अगर आप 3-4 दिनों के लिए बाहर जा रहे हैं तो हाइड्रो जैल आपके लिए बेहतरीन विकल्प है.

मल्चिंग

वाष्पीकरण के कारण मिट्टी में नमी की कमी हो जाती है, जिससे पौधे तेज़ी से सूखने लगते हैं. मिट्टी पर मल्चिंग करने से मिट्टी में लंबे समय तक नमी बनी रहती है. गीतांजलि बताती हैं, "मल्चिंग मिट्टी में पानी बनाए रखने के लिए बहुत ज़रूरी है और ज़रूरी पोषक तत्व प्रदान करती है". बेंगलुरु आधारित गार्डनर अनुसूया शर्मा का कहना है, "मल्चिंग से पौधों के लिए कम से कम तीन से चार दिनों तक के लिए पर्याप्त रूप से मिट्टी में नमी की मात्रा बनी रहती है. एक बढ़िया मल्च बनाने के लिए आप किचन के गीले कचरे का इस्तेमाल भी कर सकते हैं.” कम से कम दो इंच गहरी मल्च बिछाएं.

इलेक्ट्रॉनिक वाटरिंग सिस्टम

बाज़ार में टाइमर आधारित पानी देने के उपकरण उपलब्ध हैं, लेकिन उनमें मिट्टी की नमी का आकलन करने की क्षमता नहीं होती. इससे पौधे में पानी की अधिकता हो सकती है. इलेक्ट्रॉनिक सेल्फ-वाटरिंग सिस्टम सेंसर्स के साथ आते हैं, ताकि पौधों के सूखने पर ही पानी दिया जा सके. गीतांजली कहती हैं, "इस तरह के सिस्टम का उपयोग करने से कम पानी जाने या ज़्यादा पानी जाने की समस्या से निजात पाई जा सकती है. इन उपकरणों को सूखे के समय के लिए भी डिज़ाइन किया गया है". अगर आप एक सप्ताह से अधिक समय के लिए बाहर जा रहे हैं, तो सेंसर-आधारित वाटरिंग सिस्टम एक अच्छा विकल्प है.

प्लांट सिटर

जब आप घर में न हों, तो अपने दोस्तों से पौधों को पानी देने का अनुरोध करें. लेकिन यह भी उम्मीद न करें कि उनको आपके पौधों के बारे में सारी जानकारी होगी. उन्हें आसान और सरल तरीके से समझाएं. पौधों को उनकी पानी की आवश्यकता के आधार पर किसी छायादार स्थान पर एकत्र कर दें, इससे न केवल नमी संरक्षित होगी, बल्कि पानी देना भी आसान हो जाएगा. अनुसूया बताती हैं, "अगर आपके पास कुछ ही गमले ऐसे हैं, जिन्हें पानी देने की आवश्यकता है, तो आपके वापस आने तक उन्हें आपके दोस्त के घर पर ही शिफ्ट कर दें".

कुछ आसान उपाय

  • पौधों को अपने घर के अपेक्षाकृत ठंडे स्थानों पर रख दें, इससे इनकी नमी बरकरार रहेगी.
  • पानी के अलावा, पौधों को पनपने के लिए सूर्य की रोशनी की भी आवश्यकता होती है. पौधों को ऐसी जगह पर रखें जहां उन्हें सूरज की रोशनी सीधी मिले, जैसे कि पर्दों के पीछे या खिड़की के नजदीक. उन्हें ऐसी जगह न रखें जहां तेज धूप आती हो, इससे पौधे के सूखने का खतरा रहता है.
  • टेरेकोटा के गमलों में रखे पौधे प्लास्टिक के गमलों में रखे पौधों के मुकाबले जल्दी सूखते हैं. प्लास्टिक के गमले पौधों के लिए अधिक नमी संरक्षित करते हैं.
  • जाने से पहले पौधों को अच्छे से पानी देकर जाएं.
  • अपनी प्लानिंग अच्छे से करें. अगर आपको यह पता हो कि आप कितने समय के लिए बाहर रहने वाले हैं तो पौधों का प्रकार और उस समय में मौसम की जानकारी आपको पौधों के लिए बेहतर तैयारी करने में मदद करेगी.

कुछ अन्य सुझाव

आपकी यात्रा शुरू करने से पहले ध्यान में रखे जाने योग्य कुछ बातें…

घर के अंदर और बाहर

आउटडोर और इनडोर पादपों के मामले में पानी देने की रणनीतियां अलग-अलग होती हैं. गीतांजली बताती है कि, “बाहर लगे हुए पौधों को अपेक्षाकृत अधिक बार पानी देना पड़ता है. लेकिन घर के अंदर लगे हुए पादपों को 3-4 दिनों में एक बार पानी देना पर्याप्त होता है. एक ओर जहां बाहर बगीचे में लगे पौधों की सिंचाई के लिए ड्रिप पाइप का उपयोग करना पड़ता है, वहीं घर के अंदर लगे पौधों के लिए बहुत से सेल्फ-वाटरिंग विकल्प उपलब्ध हैं." मनिकनंदन बताते हैं कि आखिर में कोई समस्या न हो, इसके लिए पानी देने के तंत्र की पहले से ही सही तरीके से जांच कर लेना आवश्यक है. इसके अलावा टैंक और उपकरण में पानी की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना भी जरूरी है. 

अपने-आप-करें

“गीतांजली बताती हैं कि, "एक प्लास्टिक की बोतल लें और इसके ढक्कन में एक छोटा छेद कर दें जिससे पानी धीरे-धीरे मिट्टी में रिसता रहे. इसके बाद इस बोतल को उल्टा करके पौधे के पास लटका दें." इसके अलावा आप पानी के एक बड़े बर्तन को एक ऊंचे स्टूल पर भी रख सकते हैं. रुई की एक रस्सी बनाएं और इसका एक सिरा पानी में और एक सिरा पौधे के पास रख दें. इस रस्सी से पानी धीरे-धीरे रिसता हुआ पौधे में जाता रहेगा. पानी वाष्पीकृत न हो यह सुनिश्चित करने के लिए पानी के पात्र को ढक दें.